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Wednesday, September 4, 2013

रिश्ते

81

सुलगती आग आँखों में 
समझता क्यों नहीं कोई
उलझती डोर रिश्ते की 
समझता क्यों नहीं कोई
उलझने को सुलझते 
देखने मे हर्ष होता है  
बस इतना सोचता हूँ 
यह समझता क्यों नहीं कोई
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80 - ज्ञान 2 
79- समय  
76 - अलंकार
75 - कारक
74 - मोती
73 - क्यों 
72 - रिश्ते 2 
71 - मुस्कराना 
70 - सवेरा 
68, 69 - होली 2013
67 - रिश्ते 
66 - आस 
65 - गन्तव्य
64 - मैं इतना सोच सकता हूँ 15 
63 - मैं इतना सोच सकता हूँ 14 
61, 62 - मैं इतना सोच सकता हूँ 13 
60 - मैं इतना सोच सकता हूँ 12    
57 से 59 तक  - मैं इतना सोच सकता हूँ 11
54 से 56 तक  - माँ तुझे सलाम
51 से 53 तक  - मैं इतना सोच सकता हूँ 10
48 से 50 तक - मैं इतना सोच सकता हूँ 9 
47 - राजनीति 
44 से 46 तक - मैं इतना सोच सकता हूँ 8 
38 से 43 तक - मैं इतना सोच सकता हूँ 7 
28 से 37 तक - मैं इतना सोच सकता हूँ 6 
25 से 27 तक  - मैं इतना सोच सकता हूँ 5 
24 - नींद 
23 - विविधता 
20 से 22 तक - मैं इतना सोच सकता हूँ 4 
19 - विवाह 
18 - संतुष्टि 
17 - आवाज 
12 से 16 तक - मैं इतना सोच सकता हूँ 3 
7 से 11 तक - मैं इतना सोच सकता हूँ 2
1 से 6 तक - मैं इतना सोच सकता हूँ  1