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Thursday, November 24, 2011

चांटा

महंगाई का
भ्रष्टाचार का
भेदभाव का
अवसरवादिता का
झूठ का
वादों का
व
गलत इरादों का
चांटा
अब तक मारा है
सत्ताधारियों ने
आम आदमी पर

अब
जब आम आदमी
गया है बिदक
और
जीवित है
उसकी संवेदना,
आज
उसका संतोष
संयम,
धैर्य,
सहनशीलता,
तितिक्षा,
वात्सल्य,
सब
उसको कर रहे हैं
बाध्य
उस हाथ को
उठाने पर
जिसकी एक उंगली
ने सत्ताधारियों
को चुना हो.

क्यों
इस चांटे
की अधिक
चर्चा है
उस चांटे से

मेरी कल्पना से
परे है
इसकी सोच...


[24 Nov 2011, Shillong, 10:10 PM]
Today one person (Harvinder Singh, a sikh youth) slapped Sharad Pawar, Minister of Agriculture, Govt of India.  I am little skeptical about what must have prompted him to think of taking such a step.  There have been few cases of this nature before, when people have been throwing chappals/shoes on the powerful people.  It is the outburst of common man against the ruler/powerful.  Where are we heading???



Friday, August 20, 2010

पेड़ व समीकरण

पेड़,
जमीन पर उगता है पेड़
जमीन के अन्दर होती है उसकी जड़
और
जड़ पर निर्भर करता है
पेड़ का अस्तित्व.

पेड़,
पेड़ पर होती है शाखाएं
शाखाओं पर होती हैं पत्तियां
                होते हैं फूल, फल और कांटे.

पेड़ पर होती है शाखाएं
शाखाओं पर होते हैं सम्बन्ध
संबंधों से बनते हैं समीकरण
और समय पर, मौसम पर
                निर्भर करते हैं समीकरण.

पेड़ से आती है लकड़ी
और लकड़ी से बनती है कुर्सी
कुर्सी से बनते हैं सम्बन्ध

संबंधों से बनते हैं समीकरण
और समय पर, मौसम पर
                निर्भर करते हैं समीकरण.

पेड़ शांत रहता है
कभी बोलता है,
बडबडाता है,
दहाड़ता है.
पेड़ घूमता है,
नाचता है,
गाता है,
संगीत सजाता है.
पेड़ चलता है,
दौड़ता है,
समय के साथ -
जड़ के साथ - 
बिना किये कोई समझौता.

पेड़ पर रहते हैं,
कीडे, मकोडे व पक्षी.
पेड़ पर होते हैं,
आश्रित 
जीव - मनुष्य, जानवर, 
कीडे, मकोडे व पक्षी,
कुर्सी पर भी.

सम्बन्ध, समीकरण व संयोग,
समय, काल व परिस्थिति, 
पेड़ को जड़ से अलग करते हैं.
पेड़ शांत रहता है
सब कुछ सहता है.

समय, काल और परिस्थिति,
जड़, पेड़ और कुर्सी,
सम्बन्ध, समीकरण और संयोग,
अपना-अपना कहना कहते हैं,
सब कुछ सहते हैं,
पेड़, 
जड़ से अलग होकर भी.

(15 July, 2008, Shillong, 10:55 AM-12:20 Noon)