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Thursday, April 11, 2013

रिश्ते 2


72

हर गगन चुम्बी इमारत सड़क से 
दूर होती जा रही है
हर किसी रिश्ते में करवट 
क्रूर होती जा रही है
लालसा में घिर निगाहें
छत सितारे चूमती है
सोच सकता हूँ मैं इतना 
समस्या घोर होती जा रही है

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Thursday, March 21, 2013

रिश्ते


67

मुझे गीता बताती है नहीं कुछ साथ जाता है
मगर फिर क्यों मुझे केवल स्व परिवार भाता है
मेरी पूंजी मेरे रिश्ते तेरे रिश्ते तेरी पूंजी
मैं इतना सोच सकता हूँ तेरा मेरा रुलाता है

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Friday, February 22, 2013

मैं इतना सोच सकता हूँ 14


63

फूल सूखे कह रहे हैं हम पुराने हो गये हैं
सूख कर रिश्ते सभी जर्जर बहाने हो गये हैं
फूल रिश्ते पत्तियां सब डालियों से दूर हैं
सोच सकता हूँ मै इतना आने-जाने हो गये हैं

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Friday, February 8, 2013

मैं इतना सोच सकता हूँ - 12


60

दिखाई दे रहे सम्बन्ध बेमानी से लगते हैं
सभी अनुबंध में बंधकर नरक पानी से लगते हैं
वो इक एकांत में बैठा उन्ही धागों को सीता है

Friday, February 1, 2013

मैं इतना सोच सकता हूँ - 11

57

मुझे नवग्रह बताते हैं जो कांटो को सजाते हैं
मगर हम हाथ की रेखायेँ सुकर्मो से जगाते हैं
बहुत से कष्ट सहकर हम कठिन प्रयास करते हैं
मैं इतना सोच सकता हूँ दुकर्मो से बचाते हैं

58

 मेरा विश्वास संशित है मेरा अभ्यास प्रेरित है
मगर क्यों लिपि नियंत्रित हो नहीं आभास किंचित है
मेरा चिंतन तेरी द्रष्टि नहीं संयोग लगते हैं
मैं इतना सोच सकता हूँ नहीं प्रयास वंचित है

59

मैं रिश्ते ढूँढता हूँ शहर में हर दम मशीनों से
सजाकर जो दिखाती है नई दुनिया बगीचों से
मुझे कल-कारख़ाने सब पुराने ही सुहाते हैं
मैं इतना सोच सकता हूँ यही अनुभव गलीचों से

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Saturday, December 22, 2012

कौन हूँ मैं

मै वैसा नहीं हूँ
जैसा मेरी माँ सोचती है
जैसा मेरी बेटी सोचती है

माँ मुझे समझती है
एक पुत्र
वही पुत्र
जिसको उसने पाला-पोशा
मेरी पत्नी
मुझे मात्र एक पति
समझती है
मेरी बेटी
के लिए
मैं एक पिता के सिवा
कुछ नहीं

मैं स्वयं को
एक पुत्र से अधिक
एक पति से अधिक
एक पिता सोचता हूँ
अवश्य मैं
एक पुत्र हूँ
पिता हूँ
पति हूँ

मैं बना रहना चाहता हूँ
एक इंसान
एक मित्र
एक साथी
बस और कुछ नहीं
पुत्र, पिता व पति भी नहीं।