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Wednesday, January 23, 2013

सड़क


सड़क पर कांच के टुकड़े पड़े कुछ बात कहते हैं
किसी की दौड़ मंजिल बिघ्न संशय पात कहते हैं
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सभी गंतव्य सीधे हैं अगर हों साथ सच मोती
सड़क पथ द्रष्टि देती है सुझाये युक्ति नवज्योति

सड़क ले जाती है सबको सभी के घर स्वयं चलकर
मगर अपने उसूलों से वो टस से मस नहीं होती

मैं अक्सर देखकर गड्ढा सड़क पर चेत होता हूँ
मगर फिर भी मुसाफिर पर वो इक आंसूं नहीं रोती

जो सिगरट को दबाकर यों सड़क पर पीस देते हैं
वो उनकी वेदना को पढके हंसती है नहीं रोती

हमारी जिंदगी की बड रही रफ़्तार कहती है
सड़क बस सीख देती है कभी भी वो नहीं सोती

उसे गति गीत गाने से नहीं रोको नहीं टोको
कोई प्रतिफल नहीं सोचे न ही हीरे न ही मोती

सड़क ले जाती है सबको सभी के घर स्वयं चलकर

मगर अपने उसूलो से वो टस से मस नहीं होती

Thursday, November 29, 2012

पथ दिया मुझको बता पाथेय देगा कौन


ले लिया निर्णय करूँगा खोज होकर मौन
पथ दिया मुझको बता पाथेय देगा कौन

चल रहा हूँ आँख मींचे
मान कर आदेश सारे
मौन रहकर कष्ट सहकर
बिन दिशा तन के सहारे
किस दिशा मुड़ना बता निर्देश देगा कौन
पथ दिया मुझको बता पाथेय देगा कौन
ले लिया निर्णय करूँगा खोज होकर मौन

रास्ता जो ले चुका हूँ
पत्थरों संग चल रहा है
संगति सम-गति समय सुध
ज्ञान मेरा छल रहा है
कंकडों सी रेत में जल भेद देगा कौन
पथ दिया मुझको बता पाथेय देगा कौन
ले लिया निर्णय करूँगा खोज होकर मौन

झेल मौसम के थपेड़े
कुल बदन पीड़ित हुआ है
बोझ कन्धों पर लिए
नव लक्ष्य अब जीवित हुआ है
वह चमकता गाँव तुमको कर सकेगा मौन
ले लिया निर्णय करूँगा खोज होकर मौन
पथ दिया मुझको बता पाथेय देगा कौन

केश सब उलझे
हवाएं कर रहीं क्रंदन
थक गया है पथ सुझाए
प्राण प्रेरित मन
दे दिया साधन बता अब साध्य देगा कौन
पथ दिया मुझको बता पाथेय देगा कौन
ले लिया निर्णय करूँगा खोज होकर मौन

अनुभवों की पोटली ले
पथ मुझे अब भा रहा है
अब दिशा का ज्ञान कुछ
स्पष्ट होता जा रहा है
अब दिशाओं का नहीं है युद्ध मैं फिर मौन
ले लिया निर्णय करूँगा खोज होकर मौन
पथ दिया मुझको बता पाथेय देगा कौन