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Friday, June 6, 2014

आभास

कबूतरों और बन्दरों
गोर्रैयों और गिलहरियों
चूहों और छछुन्दरों
के जहाँ थे आवास
वहां मानव से दीखते
जानवरों ने
किया है अतिक्रमण
बना लिए हैं
सुन्दर से दिखने वाले
अपने आवास

घुस गए हैं उनके
घरों में
घोसलों में
बिलों में
अपने शक्ति व
धन बल से
ज्ञान बल की अनुपस्थिति में
या
होते हुए भी
उसका प्रयोग किये बिना

मानव
करने लगा है व्यवहार
इन सभी पक्षियों
व जानवरों की तरह

अब देखना है
कब पक्षी व जानवर
करेंगे
मानव सा व्यवहार
और
अपने शक्ति व ज्ञान बल से
कर देंगे बेदखल
इन मानव से दीखते
जानवरों को
अपने आवासों से

मेरा आभास

मेरा आवास

Thursday, October 18, 2012

राजनीति

47

मैं कुर्ता पहनता हूँ पर सियासत भर नहीं होती
कदम सीधे जुबां सीधी शराफ़त कम नहीं होती
ये कैसी राजनीति है जो बस कुर्सी बचाती है
मैं इतना सोच सकता हूँ खिलाफ़त कम नहीं होती
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