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Sunday, March 31, 2013

सवेरा


70
वे जहाँ तक देखते हैं 
बस अँधेरा दीखता है
पर मुझे फिर भी सुखद 
कोमल सवेरा दीखता है
रात रोशन दिन दिवाली 
दीप आशा फूल माली
सोच सकता हूँ मैं इतना 
क्यों कृषक हल खींचता है 


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