Showing posts with label प्यार. Show all posts
Showing posts with label प्यार. Show all posts

Thursday, September 27, 2012

मैं इतना सोच सकता हूँ - 8


44

मैं सूरज को बुलाता हूँ मुझे जब सांझ लगती है
मगर सब शुष्क मूल्यों सी धरा भी बाँझ लगती है
अजब मौसम गजब वर्षा अजब गर्मी गजब सर्दी
मैं इतना सोच सकता हूँ मुझे क्यों सांझ लगती है

45

मुझे जंगल सुहाता है सभी को खग बताता है
मगर फिर भी पहन कपडे आदमी कह्कहता है
जनम से जानवर होकर मनन से जानवर होकर
मैं इतना सोच सकता हूँ क्यों हर पशु सर झुकाता है

46

मैं सबसे प्रेम करता हूँ मुझे स्नेह भाता है
नहीं कोई मेरा दुश्मन सभी से अच्छा नाता है
सही हों पग सही हो पथ सही गन्तव्य सही जो जग
मैं इतना सोच सकता हूँ मुझे जीवन सुहाता है

18.7.12 Shillong
===========
i.    मैं इतना सोच सकता हूँ - 7  (38-43 CLICK HERE)

ii.   मैं इतना सोच सकता हूँ  - 6 (28-37 CLICK HERE)

iii.  मैं इतना सोच सकता हूँ  - 5 (25-27 CLICK HERE)

iv.  मैं इतना सोच सकता हूँ -      (24 CLICK HERE)

v.   मैं इतना सोच सकता हूँ -      (23 CLICK HERE)

vi.   मैं इतना सोच सकता हूँ -  4 (20-22 CLICK HERE)

vii.   मैं इतना सोच सकता हूँ -     (19 CLICK HERE)

viii.   मैं इतना सोच सकता हूँ -    (18 CLICK HERE)

ix.    मैं इतना सोच सकता हूँ -     (17 CLICK HERE)

x.     मैं इतना सोच सकता हूँ - 3 (12-16 CLICK HERE)

xi.    मैं इतना सोच सकता हूँ -  2 (7-11 CLICK HERE)

xii.   मैं इतना सोच सकता हूँ  - 1  (1-6 CLICK HERE)

Thursday, March 17, 2011

होली 2011

होली  का  हो  हुल्लड़
हाथ  में  हो  कुल्ल्हड़
गाल  पे  हो  गुलाल
नीला,  पीला  और  लाल

हम  सब  झूमें
मस्ती  में  नहायें
प्यार  की  भाषा
सब  सुने  और  सुनाएँ 

छोटी  ही  हो  गोली
नयी  सी  हो  होली
नई  नई सम्भावनायं
सभी  को  होली  की  शुभकामनाएं  .....
शिलांग .... 17 मार्च 2011....