Showing posts with label udai prakash. Show all posts
Showing posts with label udai prakash. Show all posts

Sunday, September 25, 2011

कल्पना का सूरज



Uday Prakash :
Waiting alone for the sun to appear from far beyond the clouds and mountains : Internal Exile in the Doomed Topograhy of the Language

कब निकलेगा 
कल्पना का सूरज
कब बादलों पर 
तीब्र प्रहार कर 
निकलेंगी किरनें 
और भींचती हुई 
ह्रदय को 
विवश कर देंगी
थामने को
कलम 
फिर क्या  
आंखे बोलती जायेंगी
हाथ शब्दों को उतारेंगे 
कल्पनाओं के आकाश से 
संभालकर  
अक्षरों को बांधेंगे
कुम्हार की तरह  
और
फिर तैयार होगी
एक स्मरणीय 
प्रतिमा
स्फुटित होगी
कल्पनाओं की भाषा

मुझे प्रतीक्षा है
कब
सूरज उदय होकर
देगा प्रकाश
निराशा के बादल
छंट जायेंगे
आशा
सूरज
उदय
प्रकाश.
कच्ची अमिया 
कब पकेगी...

(3:40 pm, 25 Sept 2011, Shillong)