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Thursday, May 2, 2013

प्रतिस्पर्धा व बाज़ार

उसकी साड़ी मेरी साड़ी से सफ़ेद क्यों
उसकी गाड़ी मेरी गाड़ी से बड़ी क्यों
उसकी बिल्डिंग मेरी बिल्डिंग से ऊँची क्यों
इस प्रतिस्पर्धात्मक
सामाजिक वातावरण ने
कर दिया है
वह सब कुछ
सार्थक
व
वास्तविक
बना दिया है
उसको
सामयिक
जिसकी परिकल्पना
कार्ल मार्क्स ने की थी

जिसको उसने बताया था
अत्यंत ही घातक
सामाजिक व्यवस्था के परिप्रेक्ष्य में

प्रतिस्पर्धा
व
उसमे जीतने के लिए
प्रतिस्पर्धात्मक रणनीति
किसी प्रकार
जीतने की होड़
राजनीति मे
व्यवसाय मे
आम परिवारों में
रिचर्ड ब्रेन्सन से विजय माल्या तक
लक्ष्मी मित्तल से मुकेश अम्बानी तक
सबसे पहले समाचार
पहुचाने वाले
मीडिया चैनलों में
‘इसको लगा डाला तो लाइफ झिंगालाला’
का प्रचार करते विज्ञापनों के मध्य

पूँजीवाद के
पतन की ओर जाते
देखते हुए भी
बाजार के वर्चस्व ने
संभवतः
हम सभी को
कर दिया है
अँधा
अभी भी हम कह रहे हैं
उसकी साड़ी मेरी साड़ी से सफ़ेद क्यों
हमको अच्छे लगने लगे हैं दाग
आखिर कब तक
कब तक
हम पूँछते रहेंगे
यही सवाल
उसकी साड़ी मेरी साड़ी से सफ़ेद क्यों

यहाँ
सब कुछ बिकता है
मूल्य
सम्बन्ध
अनुबंध
समर्थन 
अनुमोदन
शरीर 
तहरीर
सब कुछ
भूलिए मत
आप बाज़ार में हैं

किम# की
नीला सागर रणनीति
दर्शाती है
एक नई दुनिया
एक नया आकाश
एक नया सागर
लाल रंग से
नीला होता सागर
प्रतिस्पर्धा से परे
क्या हम सीख सकते हैं
इस कारपोरेट रणनीति
से कुछ सबक
अपने व्यक्तिगत
जीवन हेतु
वहां
जहाँ
सब कुछ बिकता हो
जहाँ
इसको लगा डाला तो लाइफ झिंगालाला
का गान हो

जहाँ
उसकी साड़ी मेरी साड़ी से सफ़ेद क्यों
की प्रतिस्पर्धा हो

मैं सोचता हूँ 
आखिर कब तक 
चलता रहेगा 
बाजारू गान 
उसकी साडी मेरी साडी से सफ़ेद क्यों.

================
# W. Chan Kim and Renée Mauborgne wrote a book entitled ‘Blue Ocean Strategy’ in 2005 where they provide a strategy to combat competition (making competition irrelevant) by creating products and services which are exclusive in nature and where there is no competition.

Friday, September 7, 2012

शिक्षा का व्यापार

नाई की दुकान पर
बिक रहा था सामान
माध्यम था रेडियो
एक निजी प्रबन्ध संस्थान के
लुभावने व भ्रामक
विज्ञापन द्वारा
बहुराष्ट्रीय कंपनियों में
छह अंकीय आय का
उदाहरण
प्रलोभन
व
आश्वासन

व्यापार की शिक्षा
या
शिक्षा का व्यापार

एक प्रश्न
कैसा होगा शिक्षा का स्वरुप
यदि शिक्षा होगी व्यापार

निवेश पर अधिक प्रत्याय
और अधिक प्रत्याय
लाभ
और अधिक लाभ

इन संस्थानों मे
शिक्षित होते छात्र-छात्राएं
उनकी जगह (सीट)  कहलाती है
माल, सामान या स्कन्ध
और
व्यापारी बेचते हैं
सामान
बाज़ार की भाषा में
बिकने वाला
सभी कुछ होता है
सामान या माल

बाज़ार में
दर्जी  की दुकान में
मोची की दुकान मे
परचून की दुकान मे
या फिर
विशालकाय 'माल' में
चलते-फिरते
बस में कार में
ट्रक में ट्रेन में
सब जगह
बाज़ार मे
नाई की दुकान मे
बिक रहा है सामान

यहाँ सरस्वती की
पूजा नहीं होती
यहाँ पूजे जाते हैं
लक्ष्मी व गणेश

कई संस्थानों का माल
नहीं रहा है बिक
उनके बड़े-बड़े
गोदामों में
सड़ रहा है
स्कन्ध
आजकल

अर्थशास्त्रीय सिद्धांतों का
पालन करते बाज़ार
मांग-पूर्ति का सिद्धांत
सीमांत उपयोगिता का सिद्धांत
प्रतिस्पर्धात्मक मूल्यों का नियम
बाजारू मूल्य
(मूल्यों का बाज़ार)
व
प्रतिस्पर्धा

मुझे ज्ञात है
जिस प्रकार
हलवाई की दुकान से
बिल्डिगों के व्यापार तक
तम्बाखू की खेती से
बीड़ियों व
पान मसाले के व्यापार तक
व्यापारी करते हैं निवेश
स्वयं या साझे में
उसी प्रकार
उतर आये हैं
वे
शिक्षा के व्यापार में
उनको बेचना है
सामान
कैसे भी
किसी को भी
येन केन प्रकारेण

छूट पर
एक के साथ एक मुफ्त
पच्चीस तीस चालीस
या पचास प्रतिशत
अधिक
उसी कीमत पर

बटोरे जाते हैं ग्राहक
कस्वे से
गाँव से
झूठे प्रलोभनों द्वारा

फिर भी
बहुतों के यहाँ
माल बेकार पड़ा है
सड  रहा है
खरीदारों की प्रतीक्षा में
मैं सोच सकता हूँ
व्यापारियों की पीड़ा
निवेश पर प्रत्याय की आशा
शायद इसीलिए
आज
बिक रहा है सामान
नाई की दुकान मे
बीड़ी पान की दुकान में

सुना है
आजकल
आयातित शिक्षा का बाज़ार
गर्म है
एक लोकल डिग्री के साथ
विदेशी डिग्री फ्री

एक प्रश्न
क्या कल यहाँ खुल जाएँगी
राईस मिलें
सुना है
इस बार धान की फसल अच्छी है

क्या कल यहाँ खुल जायेंगे
पांच सात नौ या ग्यारह
सितारा होटल
सुना है
आने वाले वर्षों मे
पर्यटन उद्योग का
बोलबाला होने वाला है
सरकारी सब्सिडी भी
बढने वाली  है

क्या यहाँ खुल जायेंगे
विशालकाय 'माल'
सुना है
फुटकर व्यापार में
विदेशी निवेश आने वाला है

क्या यहाँ खुल जायेंगे
बड़े-बड़े अस्पताल
सुना है
कीटनाशकों के निरंतर प्रयोग से
उत्पन्न होंगी
नई-नई बीमारियाँ

पैदा होंगे
नए-नए अवसर
और
इन सभी अवसरों को
परिणत किया जायेगा
पूँजी में

फ़िलहाल
नाई की दुकान में
बिक रहा है सामान

मुझे लगता है
शीघ्र ही
होंगी बंद
ये दुकाने
यदि नहीं बदलीं
आशाएं
आकांक्षाएं
व
परिभाषाएं।

(29.7.12 - लखनऊ - आज सुबह अपने छोटे  भाई के साथ नाई की दुकान गया, वहां FM Radio City पर एक प्रबंधन संस्थान  का विज्ञापन प्रसारित हो रहा था, उसको सुनकर इस कविता को लिखने की प्रेरणा मिली....27 जुलाई के हिंदुस्तान समाचार पत्र के लखनऊ संस्करण में एक खबर थी की इस शहर के 30 प्रबंध संस्थानों को इस वर्ष कोई छात्र नहीं मिला)

<29.7.12 in train Lucknow to Guwahati... 9 PM>