Wednesday, August 22, 2012

कुत्ते और आदमी

मैंने कुत्ते भी खूब देखे हैं
दुम हिलाकर सलाम करते हैं

आहटों की समझ चुनिंदा है
दुश्मनों पे सवार रहते हैं

पैर उठता है नाक घुसती है
वो भी इतना ख्याल रखते हैं

शांत रहकर भी दुम हिलाते हैं
अपने मालिक की धार करते हैं

उसकी  तहजीब आदमी सी है
भौंककर बेजुबान रहते हैं

उसकी निष्ठा विशिष्ट होती है
आदमी सब तमाम करते हैं

आदमी कुछ तो अलग हो उनसे
जिनको कुत्ते सलाम करते हैं

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25.7.12 - बरेली - 11 AM 

1 comment:

  1. बहुत खूब ... हर शेर नया व्यंग सा लगता है ...
    आदतों को बाखूबी लिखा हिया आपने ...

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