Saturday, September 18, 2010

मेरे कान

कान,
क्यों वो सुनते हैं
जो सुनना नहीं चाहता हूँ मैं
या,
दिखाना नहीं चाहता हूँ मैं
कि मैने कुछ सुना.

मैं
सुनना चाहता हूँ
वह सब
जो लोग सुनाना चाहते हैं
फिर क्यों
मेरा चुनाव
व्यक्तियों का है
न कि
वे "क्या" सुनाना चाहते हैं
उसका...

(17th Sept 2010, Shillong)