Sunday, November 18, 2012

जागो

लोग
आवाज उठा रहे हैं
चीख रहे हैं
चिल्ला रहे हैं
आवाज उठा रहे हैं

लिख रहे हैं
दिख रहे हैं
आवाज उठा रहे हैं

दूसरी ओर
लोग
शांत हैं
चुपचाप हैं
आवाज उठा रहे हैं
चुप रहकर
वे भी जागे हुए हैं
सोये नहीं हैं

शांत लोग
होते हैं
अधिक खतरनाक
अधिक भयंकर 
भिन्न होती है
उनकी भाषा
शांति की भाषा

अधिक भयावह
होती है
शांति की चीख
होता है
शांति का चिल्लाना

कुछ भी हो
चीखना-चिल्लाना
लिखना-दिखना
जागना
चुप रहकर भी
जारी  रहना चाहिए
जारी  रहेगा

बोलने-लिखने
चीखने-चिल्लाने
से अधिक
आवश्यक है
जागना
जागो
चाहे रहो शांत
लेकिन
जागो।

29.9.12... 6:30 AM  Shillong ...