Thursday, March 14, 2013

आस



66

ओस की बूँदें कहानी लिख रही हैं प्यास पर
ज्यों नहाकर धूप की किरने बुलाएँ घास पर
आँख की बारिश ह्रदय को शुष्क करती जा रही है
सोच सकता हूँ मैं इतना चल रहा हूँ आस पर

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