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Saturday, May 4, 2019

नेतृत्व नीति

व्यक्ति यदि व्यवधान का कारण बने तो जान लो
व्यक्ति ही साधन, निवारण, खोज में सहयोग देंगें
तुम अगर सम्राट बन संशय, सघन के साथ होगे
सब तुम्हारी दीप्ति के दोष का प्रयोग होंगे

साथ लो सबको सभी का साथ तुमको प्राण देगा
मान लो इसको इसी से सोच का निर्माण होगा
यदि तुम्हारा 'मैं' तुम्हे वाधित करे स्वीकारने को
मान लेना कट गया जीवन यहीं विश्राम होगा

क्यों हुआ विद्रोह इसको जान लो अच्छा रहेगा
क्यों लगी है आग यदि संज्ञान लो अच्छा रहेगा
कारकों के कारणों को कुछ समय देकर समझना
बिन सजे संवरे धवल दर्पण सभी सच्चा कहेगा

भूल जाओ भूत की भाषा भले 'मैं' रोकता हो
दृष्टि डालो नव तिमिर पर ह्रदय कुछ भी सोचता हो
काठ की कुर्सी किसी के साथ कुल जीवन नहीं है
जामवंतो से हुआ निर्मित भले पद टोकता हो

उठो उठकर रीढ़ को कुछ लोच देकर आंख पोछो
उस अमावस रात का तुम ऋण उतारो हाथ पोछो
पूर्णिमा का चांद अपनी रोशनी संचित किये है
झुको झुककर सूर्य के सम्मुख नया निर्माण सोचो

खोल वाहें खिलखिलाओ हंसो अट्टाहस करो तुम
मिलो मिलकर झूमलो खुलकर जरा साहस करो तुम
नहीं कटु स्मृतियां सदा व्यक्तित्व से संलग्न रहतीं
उठ अंधेरों की विदा का आज दुःसाहस करो तुम

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Wednesday, October 23, 2013

कुर्सी

कुर्सी
प्रतीक्षा में है
कोई आये
और
उसको अपनाये
अपने सपनो से कहीं अधिक
अपनी भूख से परे
अपनी सीमाओं में रहकर।

अप्रत्याशित
अस्वभाविक
असहनीय
वेदना में लिप्त
कुर्सी
प्रतीक्षा में है।

क्या नहीं देखा
अनुभव किया
इस कुर्सी ने
विभिन्न व्यक्तियों का सानिग्ध
उनका व्यक्तित्व
उनकी भाषा विचार व्यवहार
क्या-क्या नहीं सहा
इस कुर्सी ने
प्रज्ञा प्रबोध व पीड़ा
प्रमोद प्रसाद व परिवाद।

कुर्सी को ज्ञात है
उसका अस्तित्व
उसके हत्थों पर रखे
मजबूत हाथो से है
उसके जमे हुए पाओं से है
उसके नुकीले काँटों पर
निस्वार्थ
निर्विवाद
व निष्पक्ष भावना से लिए
निर्णयों में है
उसका अस्तित्व
निर्भीक व्यक्तित्व से है।

कुर्सी का अस्तित्व कदापि नहीं है
उसकी लकड़ी
या वनावट से
उसपर लगी दीमक से
उसकी पूजा करने वालों से
उस पर की गई पॉलिश से
या
पोंलिश करने वालों से
उसके सेवादारों से
उस पर भिऩकने वाली मक्खियों से।

कुर्सी
प्रतीक्षा में है
कोई आये
संभाले व सजाये
मेरी शोभा बढ़ाए
काँटों की पीड़ा से परे
फूलों की सेज सजाये
कोई आये
अपने व्यक्तित्व की खुशबू से
वातावरण को महकाए
नई ऊर्जा को जन्म दे
संस्थान को चमकाए
कोई आए
कोई आए
कुर्सी
प्रतीक्षा में है।