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Thursday, April 25, 2013

मोती


74

मैं चलना चाहता हूँ 
इस धरा पर शूल में बंधकर
जो उस कल को सुधारे 
सीप बन संघर्ष जीवन भर  
मैं इस गहरे समंदर मे 
कोई मोती तो पाउंगा
मैं इतना सोच सकता हूँ 
नदी में प्यार की बहकर

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