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Thursday, September 8, 2011

My Intention

I have closed
Windows,
As I fear
Fresh Air.

I have closed
Doors,
As I fear
Honest Visitors.

I have closed
Garden Gate,
As I fear
Blooming Buds
and
Soothing Odour.

You read my intentions,
I Hope and
You Can.

(5:50 pm, L-57, NEHU, Shillong: 4th Sept 2011)

Friday, December 3, 2010

स्वार्थ

स्वार्थ
कठिन है
समझ पाना अर्थ
परिस्थिति, समय व व्यक्ति
पर निर्भर है
इसकी परिभाषा
इसका अर्थ

स्वयं के अर्थ हेतु किया गया कृत्य
स्वयं
प्रत्येक परिधि पर लागू है
व्यक्ति पर
क्षेत्र विशेष पर
समूह विशेष पर
देश विशेष पर
आदि,  इत्त्यादि.

स्वार्थी
कोई व्यक्ति, क्षेत्र, समूह, या देश
अधिकतर
प्रयोग इस शब्द का होता है संकुचित
व्यक्ति विशेष के सन्दर्भ में
द्रष्टिकोण भिन्नता दर्शाता है
दर्शाता है
शब्द के भिन्न प्रयोग.


मानवता 
क्या स्वयं की परिधि से परे है?
यदि नहीं
तो स्वार्थ प्रत्येक जगह है
किसी ना किसी रूप में
छावं में या धूप मे 
स्वार्थी 
प्रत्येक जगह हैं
हाथ में या पावं में
धूप मे या छावं में
प्रदेश मे या देश में
किसी ना किसी भेष में
देश में या परदेश में
मेल में या क्लेश में
गर्मी में, बरसात में
दिन में या रात में
बसंत में या जाडे में
मुफ्त में या भाडे में
घर में या वाहर
लेखक या शायर
साहसी या कायर
सच्चा या लायर

स्वार्थ
प्रत्येक जगह है
किसी ना किसी रूप में
छावं में या धूप में...

(Sherubtse College, Kanglung - Bhutan, Exam duty Room No B New building, 23rd Nov 1994, 10:40 AM)

Friday, November 12, 2010

साहस, परिस्थितियाँ व मजबूरी

जो महसूस करता हूँ
कह नहीं सकता
लिख सकता हूँ
जो महसूस करता हूँ
अप्रत्यक्ष रूप से
कह भी सकता हूँ.

प्रत्यक्ष
लिख सकता हूँ.

अभाव
साहस का
नहीं
अनुकूल परिस्थितियों का.

कोई दीवार खड़ी है
प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष के मध्य
साहस व परिस्थितियों के मध्य
कहना - किसको
निर्भर करता है
परिस्थितियों पर.

किसी से कह नहीं सकता
किसी से भी नहीं
विश्वास के कारण
लिखा किसी को दिखा नहीं सकता
किसी को भी नहीं
विश्वास के कारण
लिखता हूँ किसके लिए फिर
स्वयं को अनुभव दिलाने के लिए!

शायद इसलिए कि
साहस और परिस्थितियों से
समझौता प्रदर्शित कर सके
जो कुछ मैं लिखूं.

या फिर
जब साहस हो तब
दिखा सकूं
पड़ा सकूं
प्रकाशित करा सकूं.

वास्तव में
सबकुछ
परिस्थितियों पर निर्भर है
समय पर भी
स्वयं पर भी
कोई एक अकेला इसके लिए उत्तरदायी नहीं है
आखिर इसीलिये
सोचना पड़ता है,
बोलने से पहले
कहने से पहले
कुछ भी
और लिखने से पहले
कुछ भी

अंततः:
सबकुछ ना कह सकता हूँ,
सबसे
न लिख सकता हूँ
सबके लिए
प्रयास कर सकता हूँ
अवश्य
साहस, परिस्थितियाँ व मजबूरी...

(Quarter No 33, Sherubtse, Kanglung, Bhutan: 2.11.1994..4 PM.. tomorrow is diwali)

Wednesday, May 19, 2010

परिणति

शोर बहुत है
घर घर चर्चा है
शायद
कहीं कुछ हो गया है
या फिर
किसी का कुछ खो गया है
तलाश जारी है मगर......

आमने- सामने खडें है
दोनों प्रतिध्वंदी
उनको नहीं मालूम
कहाँ क्या हुआ
किसने किया
क्यों हुआ
कैसे हुआ
किसकी दुआ
किसकी बद्द्दुआ
आखिर ऐसा तो
कुछ नहीं हुआ.

किसी को
फलता-फूलता देखा नहीं जा सकता
यदि जा सकता है देखा
तो फिर कटी निगाह से
जो दिखाई ना दे
कहीं से
प्रायः जैसा होता है.

कौन कहता है कि
कहीं कुछ हुआ है.

प्रयास कर रहे हैं
दूर रहें
समाचार पत्र पर डाले निगाह
और समझें
कहाँ क्या हुआ.
शोर क्यों है
कारण क्या है.

आग हर घर मे
क्यों है
इसकी लपटें
कहीं बर्बाद ना कर दें
मेरा आशियाना
कृपया मात्र इतना बतलाना
अब मुझे किधर चाहिए जाना
पश्चिम या पूरब
दक्षिण या उत्तर
असमंजस
आप रहेंगे निरुत्तर
यदि ना हो सका प्रयास
चुप रहने का
फिर लांघ जायेगा सीमा
उसका 'मैं' दिखायेगा
अपनी औकात
किसी की समझ में नहीं आएगी
कोई बात
क्योंकि देखा यह गया है
कि शोर की
परिणति होती है
शांति से
सन्नाटे से
धीरे...

(२३ नवम्बर, १९९१, १०:३० सुबह, हर्मंन माइनर स्कूल, भीमताल, नैनीताल, उत्तरप्रदेश - उत्तरांचल)

Monday, May 17, 2010

साहस

मुझको मालूम है
तुम्हारी आदत,
मैं जानता हूँ,
या
समझ सकता हूँ,
कब, कहाँ, क्यों, क्या होगा,
कौन करेगा,
परन्तु,
मौन हूँ,
क्यों,

पता नहीं.

मैं कुछ नहीं जानता,
उन्हें इन्तजार नहीं है,
सुबह का,
उन्हें प्यास है,
पानी की नहीं,
किसी और की.

वर्तमान में,
सच यह है,
कि
मैं कुछ नहीं जानता,
मुझे मालूम भी नहीं है
कुछ,
क्योंकि सत्य,
सत्य है,
एक कटु सत्य,
जिसे स्वीकारना
परे है,
स्वयं सत्य से,
सब जानते हैं,
सभी को मालूम भी है,
सत्य क्या है,
परन्तु,
साहस सब मे नहीं है,
है  - परन्तु कुछ में.


सत्य,
पीछे है,
काले शीशे कि उस दीवार के,
जिसमे,
इधर से उधर का,
देखा जा सकता है,
उधर रौशनी होने पर,
इधर रौशनी होने पर,
देखा जा सकता है,
उधर से इधर का.

निष्कर्ष,
सत्य को चाहिए,
अभिव्यक्ति,
और
अभिव्यक्ति को चाहिए,
रौशनी - प्रकाश,
और उस हेतु चाहिए,
साहस
जिसकी तलाश है...

(३१ अगस्त १९९१, १०:३५ सुबह, हर्मन माइनर स्कूल, भीमताल, नैनीताल, उत्तरप्रदेश, उत्तरांचल)