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Tuesday, November 12, 2019
Monday, November 3, 2014
हार-जीत
मैं लड़कर जीतता हूँ
जीतकर लड़ता नहीं हूँ अब
खड़ा हो सोचता हूँ
भीगकर पढता नहीं हूँ अब
अजब सी जीत है
सांसत में अक्सर छोड़ देती है
मैं इतना सोचता हूँ
हार मे ही जीतते हैं सब
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Friday, February 14, 2014
आस
सो गयी संसद भुलाकर
कृत्य काली रात के
जग गई है आस जन मे
जन्म नव जज्वात के
बर्ष बीता रात भागी
धुंध छटकर बात जागी
सोच सकता हूँ मैं इतना
शह दिखाकर मात के
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Friday, December 28, 2012
शब्द
शब्द दान है शब्द मान है
शब्द भागवत शब्द कुरान है
शब्द सवेरा शब्द सांझ है
शब्द सवेरा शब्द सांझ है
शब्द रोशनी
शब्द चाँद है
शब्द जीत है
शब्द हार है
शब्द आर है
शब्द पार है
शब्द पीर है
शब्द नीर है
शब्द शाश्वत
शब्द नीड़ है
शब्द शक्ति है शब्द बाण है
शब्द ब्रह्म है शब्द प्राण है
शब्द शक्ति है शब्द बाण है
शब्द ब्रह्म है शब्द प्राण है
Tuesday, August 28, 2012
मैं इतना सोच सकता हूँ - 7
38
मुझे हर हार में अपनी, सुहानी आस दिखती है
मगर जब जीत होती है, पुरानी प्यास बुझती है
मेरा गिरना, तेरा उठना, तेरा गिरना, मेरा उठना
मैं इतना सोच सकता हूँ, हार से जीत झुकती है।
10.7.12 - Shillong 9 pm
39
11.7.12 - Shillong 11 pm
40
मेरा प्रकाश से लड़ना, अँधेरे जान लेते हैं
मगर क्यों पूर्णिमा को पूज, अमावस मान लेते हैं,
कभी तो जल दिए सा रौशनी कर सोच उनकी भी,
मैं इतना सोच सकता हूँ, सुमन खिल प्राण देते हैं।
12.7.12 - 8:30 AM , Shillong
41
मेरे अपने मुझे मेरी छिपी क्षमता दिखाते हैं,
कपिल सन्दर्भ देकर कोष का दर्शन बताते हैं,
मेरी क्षमता, मेरी सीमा, मेरी नीति, मेरी नियति,
मैं इतना सोच सकता हूँ, वो फिर भी तिलमिलाते हैं।
12.7.12 - 9 AM , Shillong
42
मुझे प्रकृति बुलाती है, हरी दुनिया दिखाती है,
मगर हर दाल पेड़ों की व्यथा पर मुस्कराती है
हरी डालें भरी डालें कटी डालें फटी आंखें
मैं इतना सोच सकता हूँ, मुझे जड़ से हिलाती हैं
12.7.12 - 9:30 AM , Shillong
43
मुझे बकवास का दर्शन बड़ा संजीव दिखता है
मगर हर शब्द अपने में मुझे गांडीव दिखता है
जहाँ तक कल्पना पहुंचे मेरा एहसास पहुंचेगा
मैं इतना सोच सकता हूँ, नहीं निर्जीव दिखता है
12.7.12 - 9:40 AM , Shillong
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i. मैं इतना सोच सकता हूँ - (1-6 CLICK HERE)
ii. मैं इतना सोच सकता हूँ - 2 (7-11 CLICK HERE)
iii. मैं इतना सोच सकता हूँ - 3 (12-16 CLICK HERE)
iv. मैं इतना सोच सकता हूँ - (17 CLICK HERE)
v. मैं इतना सोच सकता हूँ - (18 CLICK HERE)
vi. मैं इतना सोच सकता हूँ - (19 CLICK HERE)
vii. मैं इतना सोच सकता हूँ - 4 (20-22 CLICK HERE)
viii. मैं इतना सोच सकता हूँ - (23 CLICK HERE)
ix. मैं इतना सोच सकता हूँ - (24 CLICK HERE)
x. मैं इतना सोच सकता हूँ - 5 (25-27 CLICK HERE)
xi. मैं इतना सोच सकता हूँ - 6 (28-37 CLICK HERE)
मुझे हर हार में अपनी, सुहानी आस दिखती है
मगर जब जीत होती है, पुरानी प्यास बुझती है
मेरा गिरना, तेरा उठना, तेरा गिरना, मेरा उठना
मैं इतना सोच सकता हूँ, हार से जीत झुकती है।
10.7.12 - Shillong 9 pm
39
मुझे सब कष्ट प्यारे हैं, वो जीने के सहारे हैं,
मगर फिर भी ख़ुशी के पल, ठहाकों में गुजारे हैं,
मेरा हँसना, मेरा रोना, मेरे आंसूं, मेरा हँसना,
मैं इतना सोच सकता हूँ, सभी आंसूं हमारे हैं।
11.7.12 - Shillong 11 pm
40
मेरा प्रकाश से लड़ना, अँधेरे जान लेते हैं
मगर क्यों पूर्णिमा को पूज, अमावस मान लेते हैं,
कभी तो जल दिए सा रौशनी कर सोच उनकी भी,
मैं इतना सोच सकता हूँ, सुमन खिल प्राण देते हैं।
12.7.12 - 8:30 AM , Shillong
41
मेरे अपने मुझे मेरी छिपी क्षमता दिखाते हैं,
कपिल सन्दर्भ देकर कोष का दर्शन बताते हैं,
मेरी क्षमता, मेरी सीमा, मेरी नीति, मेरी नियति,
मैं इतना सोच सकता हूँ, वो फिर भी तिलमिलाते हैं।
12.7.12 - 9 AM , Shillong
42
मुझे प्रकृति बुलाती है, हरी दुनिया दिखाती है,
मगर हर दाल पेड़ों की व्यथा पर मुस्कराती है
हरी डालें भरी डालें कटी डालें फटी आंखें
मैं इतना सोच सकता हूँ, मुझे जड़ से हिलाती हैं
12.7.12 - 9:30 AM , Shillong
43
मुझे बकवास का दर्शन बड़ा संजीव दिखता है
मगर हर शब्द अपने में मुझे गांडीव दिखता है
जहाँ तक कल्पना पहुंचे मेरा एहसास पहुंचेगा
मैं इतना सोच सकता हूँ, नहीं निर्जीव दिखता है
12.7.12 - 9:40 AM , Shillong
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i. मैं इतना सोच सकता हूँ - (1-6 CLICK HERE)
ii. मैं इतना सोच सकता हूँ - 2 (7-11 CLICK HERE)
iii. मैं इतना सोच सकता हूँ - 3 (12-16 CLICK HERE)
iv. मैं इतना सोच सकता हूँ - (17 CLICK HERE)
v. मैं इतना सोच सकता हूँ - (18 CLICK HERE)
vi. मैं इतना सोच सकता हूँ - (19 CLICK HERE)
vii. मैं इतना सोच सकता हूँ - 4 (20-22 CLICK HERE)
viii. मैं इतना सोच सकता हूँ - (23 CLICK HERE)
ix. मैं इतना सोच सकता हूँ - (24 CLICK HERE)
x. मैं इतना सोच सकता हूँ - 5 (25-27 CLICK HERE)
xi. मैं इतना सोच सकता हूँ - 6 (28-37 CLICK HERE)
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