Friday, January 24, 2014

राह


मैं आंखें खोलकर चल लूं 
तुम आंखें खोलकर देखो
मुझे जो भी मिले रस्ता 
मिले राही मगर देखो
नहीं गन्तव्य से मतलब 
नहीं पहुंचूं नहीं चिंता 
मैं इतना सोच सकता हूँ 
स्वयं हित छोड़ कर देखो
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Saturday, January 18, 2014

समय

नमक तेल मसाले
डीज़ल पेट्रोल गैस
आलू प्याज़ टमाटर
लकड़ी कोयला कपड़ा
सभी हो रहे हैं महंगे
और
सस्ते हो रहे हैं
सम्बन्ध

मौत के कारण

सस्ती हो गयी है
मौत
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Thursday, January 16, 2014

मंजिल

हर नयी मंजिल मुझे 
शुरुआत लगती है 
बीत जाने पर 
सुबह सी रात लगती है
मन्त्र चलना फिर संभलना 
यदि अटकना फिर संभलना
सोंचता हूँ अब 
सुलभ यह बात लगती है 

(Every new achieved aim looks like a new beginning as every passed night gives a fresh morning. So be effortful and alert and if you face obstacles try overcoming them. This is what I think is a better way to lead life.)
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Wednesday, December 18, 2013

वासना

(१६ दिसंबर २०१२ की रात भारत की राजधानी दिल्ली में एक अमानवीय, अशोभनीय व ह्रदयविदारक दुर्घटना हुई जिसने संभवतः प्रत्येक भारतीय के मस्तिष्ट को झकझोर दिया. बीते वर्ष के अंतिम दो सप्ताहों में दिल्ली की सड़कों पर एक आन्दोलन ने जन्म लिया, समाचार पत्रों व टीवी चैनलों पर चर्चाओं व परिचर्चाओं ने एक ऐसा वातावरण बनाया जिसकी परिणति एक सख्त क़ानून बनकर हुई. मैंने उन्ही दिनों यह कविता लिखी थी, अब आप सभी के साथ साझा कर रहा हूँ.)

वासना बस वास करती 
सड़क लतपथ सांस भरती
इस जगह से उस जगह तक 
इस बदन से उस बदन तक 
वाहनों की आस भरती
सड़क लतपथ सांस भरती 
वासना बस वास करती

ज्योति बोली आँख खोलो 
कुल ह्रदय के पाट खोलो 
इस जखम से उस जखम तक 
उस वतन से इस वतन तक 
मानसिकता को टटोलो 
कुल ह्रदय के पाट खोलो
ज्योति बोली आँख खोलो 

नीति झूठी न्याय झूठा 
सकल कागज़ ज्ञान झूठा 
इस कलम से उस कलम तक 
इस नियम से उस नियम तक 
व्यक्तिमुख विज्ञान झूठा 
सकल कागज़ ज्ञान झूठा
नियति झूठी न्याय झूठा 

कौन झूठा कौन सच्चा 
मौन रूठा मौन सच्चा 
इस विनय से उस विनय तक 
इस विजय से उस विजय तक 
बदन झूठा प्राण सच्चा 
मौन रूठा मौन सच्चा
कौन झूठा कौन सच्चा 

कौन जीते कौन हारे 
आँख भीगी मौन हारे 
इस शहर से उस शहर तक 
इस ह्रदय से उस ह्रदय तक 
जीत किसकी कौन हारे 
आँख भीगी मौन हारे
कौन जीते कौन हारे 

मौत जीती शर्म हारी 
दामिनी यम दीप प्यारी 
इस सफ़र से उस सफ़र तक 
इस सड़क से उस सड़क तक 
कान रोये आँख भारी 
दामिनी यम दीप प्यारी
मौत जीती शर्म हारी 

यत्न सच्चा युक्ति सच्ची 
बदन झूठा म्रत्यु सच्ची 
इस करम से उस करम तक 
इस जनम से उस जनम तक 
सच समर्थित सूक्ति सच्ची 
बदन झूठा म्रत्यु सच्ची
यत्न सच्चा युक्ति सच्ची 

ह्रदय अच्छा जतन अच्छा 
कुल बदन कुल मनन अच्छा 
इस विषय से उस विषय तक 
इस सतह से उस सतह तक 
संघ सच संकल्प सच्चा
कुल बदन कुल मनन अच्छा
ह्रदय अच्छा जतन सच्चा 

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Monday, December 9, 2013

कपड़े

मैं कपड़ो को पहनता हूँ
मुझे कपड़े पहनते हैं
बदन का आवरण बन
वेदना को पंख देते हैं
कहाँ संकट कहाँ पीड़ा
कहाँ संचय कहाँ संशय
मैं इतना सोच सकता हूँ
कि क्यों कपड़े बदलते हैं
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Thursday, November 28, 2013

सोच सकता हूँ

मैं सुनाता आ रहा हूँ 
गीत कविता
सुन जिसे क्यों सो गया है
कुल जहाँ संकुल यहाँ 
क्यों आँख खोले सो गया है
सत्य आशय झूठ संशय
एक आशा एक भाषा
सोच सकता हूँ मैं इतना
तन बदन अब रो गया है
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Friday, November 15, 2013

मोबाइल की सीख

क्या सोचता होगा
बेचारा मोबाइल

सुनता है सबकी कहानी
उसको संप्रेषित करता है
चुन लिए गए लोगो को
मोबाइल पहचानता है
उसके मालिक के
विभिन्न रूपों को
मालिक की
हर क्षण परिवर्तित
भाषा व शैली
भाव व बोली

मोबाइल परेशान होता है
कभी-कभी हँसता है
जोर से
कभी-कभी क्रुद्ध होता है
सर पीटता है
मालिक को गाली देता है
मालिक की
निष्ठा के क्षणिक बदलाव पर
चुप रहता है
(बोलने की
प्रबल इच्छा होते हुए भी)

मोबाइल
लड़ाई का कारण बनता है
लड़ाइयों को कई बार
समाप्त भी करवाता है
कितनी ही बार झूठ सहता है
बहानों को संजोता है
दोस्त और दुश्मनों को
अपने में सुरक्षित करता है
अट्टहासों पर रोता है
बेबुनियाद अश्रुओं पर हँसता है

मोबाइल का
चेतन व अवचेतन एक है
किसी भी भेद से परे
नेटवर्क होते हुए भी
नेटवर्क न होने का बहाना
घर में होते हुए
बाहर होने का बहाना
मीटिंग में न होते हुए भी
मीटिंग में होने का बहाना
आदि इत्यादि
न जाने कितने
सच दिखने वाले झूठ 
सहता है

मोबाइल फिर भी
नहीं रखता है
अपने मालिक को
अपने स्पर्श से बंचित
उसकी परम श्रद्धा पूज्यनीय है
वन्दन योग्य है

मैंने कई मनुष्यों को देखा है
मोबाइल की भांति
करते व्यवहार
मोबाइल की भांति
करते स्वीकार
सत्य-असत्य सब
मोबाइल की भांति
करते ग्रहण सबकुछ
अपनी परम श्रद्धा
व विश्वास
अपने मालिक के प्रति
क्या हम कुछ
पूर्ण अथवा आंशिक रूप से
सीख सकते है
इस सीधे-साधे-सच्चे
मोबाइल से