Friday, December 2, 2011

सांस


2.
मुझको सांसें गिना रही थी वो
जो घडी देख कर गुजरती थी
मेरा सारा गणित अधूरा था
जिन्दगी सांस ही से चलती थी.

3.
सांस चलती है तो सताती है
सांस रूकती है तो सताती है
सांस आवागमन का माध्यम है
जिंदगी को बहुत बताती है.

2nd Dec 2012, 8 PM, Shillong

4 comments:

  1. मेरा सारा गणित अधूरा था
    जिन्दगी सांस ही से चलती थी.

    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ

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  2. वाह...बेजोड़ भावाभिव्यक्ति...बधाई स्वीकारें

    नीरज

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